Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 20 February 2025
(औरत दर्द की मीना कुमारी है)
(औरत दर्द की मीना कुमारी है)
औरत प्यार मे
इस कदर डुब जाती है,
कि वार देती है खुद को,
फरेब की बाँहो मे।
फिर रोती बहुत है--
तन्हाई-घुटन जीती है,
बनके सुलगती है गीली लकड़ी,
ऐ,रंग--
औरत दर्द की मीना कुमारी है।
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