Tuesday, 25 February 2025

(दो घाव हो गए)

(दो घाव हो गए )

जिन उरोजों को ढ़क,
वे मासूम देखती थी,
कभी वात्सल्य का सपना,
ए "रंग "
उसके वही दोनों उरोंज,
गरीबी के चलते-----
दो घाव हो गए.

No comments:

Post a Comment