Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 20 February 2025
(अमीन सयानी)
ऐ वक्त––
अपनी शहनाई
और साज रख दे!
माथे पे इसके
तू अपना हाथ रख दे !
इस रेडियो के "जफर" ने
ताजिंदगी आवाज दी है
इसके सिरहाने
"गीतमाला" ना सही
तो तू
किसी के सिसकने कि
आवाज रख दे .
अलविदा अमीन सयानी 😢😢🙏🙏
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