Tuesday, 4 February 2025

(बहु श्रवण हुई)

(बहु श्रवण हुई)

अपनी सास के पांव 
और उसकी आस्था का चरण हुई 
धन्य है यह कुंभ 
कि जहां,अपनी सास के लिए 
बहु श्रवण हुई .

तुम्हारा वामपंथ
कुतर्की,कुमार्गी, विधर्मी हैं 
तुम्हारे यहां तो 
औरतों के संस्कार तक की क्षरण हुई.

जबकि धन्य है यह देश 
और धन्य है बहु
जो उठा के अपने कांधे पर 
कुंभ-पुण्य ले चली 
वाह,वाह रे सनातन 
कि व्याह में ऐसी बहु 
इस घर 
वरण हुई 
कि अपनी सास के लिए 
वह श्रवण हुई..

हर हर गंगे जय महाकुंभ जय प्रयागराज 🙏 🙏 

रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियाँपुर 
जौनपुर --222002 (U P)
rangnathdubey90@gmail.com

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