Saturday, 10 January 2026

रोना

राहुल गाँधी के बहरीन मे कही बातो पे एक तिखा कटाक्ष--------
              (चीन और बहरीन मे रोते है)
वाह रे! सत्ता कि तेरे जाने के गम में------
राहुल गाँधी चीन और बहरीन मे रोते है।
तु इनसे छिन गई,
और थम गई इनके खानदानी जश्ऩ की शहनाई,
अब ये किसी लुटे दलिद्र की तरह,
असह्म पीड़ा की पीपीहिरी,
और किसी मज़मे मे कम कमाई करने वाले सपेरे,
की खिसियाई बीन मे रोते है।
वाह रे! सत्ता कि तेरे जाने के गम मे-----
राहुल गाँधी चीन और बहरीन मे रोते है।
ये हिन्दू ,मंदिर,जनेऊ,दलित,मुस्लिम 
सब होने को तैयार है,
लेकिन शायद इन्हें नही पता,
कि सत्ता अब इनके दुर की कौड़ी है,
क्योंकि इस देश मे मोदी और शाह,
सियासत के बड़े अईयार है,
तभी तो दाल इनकी न गल रही किसी हाँडी,
कुछ नही यार ये काग्रेंसी दुर्दिन है,
जब जिते तो ठीक था,
हार गये तो इवियम मशीन मे रोते है।
वाह रे! सत्ता कि तेरे जाने के गम मे----
राहुल गाँधी चीन और बहरीन मे रोते है।

@@@इस रचना का उद्देश्य किसी पार्टी के सिद्धांतो से जुड़े व्यक्ति को आहत करना नही है,ये महज एक त्वरित घटना की अभिव्यक्ति मात्र है,लेखन पार्टीगत नही अपितु घटनागत होता है।

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