Rangnath Dubey's Poems
Wednesday, 14 January 2026
संगम पर स्नान करती है
(संगम पर स्नान करती है)
हमारी आस्था सभी को,
हैरान करती है,
कभी पूजा,
कभी अजान करती है.
एक तरफ शायर करता है वजू,"रंग"-
तो एक तरफ हमारी कविता भी-
संगम पे स्नान करती है.
रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियापुर
जौनपुर 222002 (U P)
rangnathdubey90@gmail.com
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