वे देखो हंस रही हैं
आंख में आसूं लिए
भ्रूण में मार डाली गई बेटियां,
कातिल मां भी
पछता रही
कि क्यों उसने मार दी
आखिर
बेटे की चाह में
अपनी पेट में पल रही
कई बेटियां
जिस खेल में
सर झुका आए थे
तमाम बेटे
उसी खेल में जीती
और हमारी आइकान,
हुई बेटियां 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियापुर
जौनपुर,(U P).
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