Wednesday, 21 January 2026

प्राण प्रतिष्ठा में नहीं आए

हे!श्री राम आप विपक्ष को सद्बुद्धि दे!
 
(प्राण प्रतिष्ठा में नही आए!)

हे!राजनीति के असुरों,
तुम,हमारी धर्म और निष्ठा में नहीं आए
प्रभू श्री राम कि
प्राण प्रतिष्ठा में नही आए.

तुम्हें राज चाहिए
तो तुम भूल जाओ 
ऐ हमारी आस्था के औरंगजेबों 
हमे पता है कि, तुम फर्जी 
दलित हित में चीखते हो 
जबकि तुम
इंतजार करती हुई किसी 
राम भक्त शबरी के घर नही आए.

अयोध्या में
भरत के प्रेम के खड़ाऊं 
में राम परिलक्षित थे 
लेकिन तुम
भीतर के अक्रांता
उस खड़ाऊ में
भाई के लिए ,किए गए
एक भाई के सत्ता त्याग को
देख नही पाए.

सरयू के पानी में 
कैकई और कौशल्या के आंसू 
टपके थे,
तुम ऐसी मां की पीड़ित
उस प्रतीक्षा में नही आए.

जाओ! तुम्हें 
अयोध्या शापित करती है,
कि तुम 
सिर्फ मुस्लिमों के यहां
इफ्तार करोगे,
क्योंकि तुम
हमारे प्रभू श्री राम
कि होली, दीवाली की भक्ति 
और उनके किसी इफ्तार में नही आए.

तुम,हमारी धर्म और निष्ठा में नही आए
प्रभू श्री राम कि
प्राण प्रतिष्ठा में नही आए.

✍️✍️ यह रचना मेरी स्वरचित और अप्रकाशित है.

रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियापुर
जिला-जौनपुर (U P)

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