Rangnath Dubey's Poems
Sunday, 2 April 2023
(इस्लाम और माँ)
ऐ इस्लाम़ के चंद काफ़िरो!
तुम्हारी बेज़ा फतवो से---
इसकी ईज्जत कम नही होती।
क्यूँकि ऐ,रंग--------
मूल्क़ वे मुकद्दस माँ है,
जो कभी मज़हब नही होती।
@@कुछ तथाकथित बेज़ा फतवे के खिलाफ ऐक सच।
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