Tuesday, 4 April 2023

(महबुब का दिल धड़का था)
ऐ शहर---------
मेरी जश्ऩ-ए-उर्स मे,
मेरी ही किताब के चंद शे,र पढ़ना!
क्यूँकि कभी इसकी हर्फों मे,
ऐ,रंग---------
मेरी महबुब का दिल धड़का था।

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