Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 8 April 2023
(झुठे वादे रह गये होंगे)
उदास बगीचे हो गये होंगे,
स्वप्न आँखो से बनके आँसू बह गये होंगे।
विरह झेलती होंगी तेरी तमन्नाये,
तेरे प्रिये के झुठे वादे रह गये होंगे।
@@आज एक अलग नेचर की चंद लाइन।
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