Rangnath Dubey's Poems
Sunday, 23 April 2023
(मुमताज़ की आँखे)
है सबसे खुबसुरत मेरी मुमताज़ की आँखे,
कितना कशीश,कितना नशा लिये है-----
मेरी मुमताज़ की आँखे!
कभी यहाॅ उठे,कभी वहाँ उठे,
है कैमरे से कही अच्छि--------
मेरी मुमताज़ की आँखे।
है मेरा दिले परिंदा परवाज़ को बेचैन,
ऐ,रंग---आसमाँ है मेरी मुमताज़ की आँखे।
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