Wednesday, 5 April 2023

(तुझे मै हिर लिखुगाँ)
मै इंतज़ार की कागज़ पे------
अपने लहू से तुझे हिर लिखुँगा।
इस सारी कायनात मे-----
बस तुही एक ज़ीनत और नही कोई,
मै अब हर एक चेहरे को------
तेरी ही तस्बीर लिखुगाँ!
अपने लहू से तुझे हिर लिखुँगा।
तेरी तिज़ारत है रब की तिज़ारत,
क्या खाक जाऊ ऐसे मे मस्ज़िद की तरफ मै,
है अजान तु मेरी,है कुर्आन की आयत!
तेरी पाजेब की आवाज़ को मै संगीत लिखुँगा।
अपने लहू से तुझे मै हिर लिखुँगा।
मै ना सही दाग,,और ना ही सही गालीब,
पर फिर भी ना मुझे गम!
मेरी साँस मे है ईश्क,
ये खुद मे गज़ल है,
ऐ,रंग----जब-जब याद आयेगी उसकी,
तो उसके चेहरे को चाँद------
जुल्फ़ो को जंजीर लिखुँगा।
मै इंतज़ार की कागज़ पे------
अपने लहू से तुझे हिर लिखुँगा।

@@आज की ये रचना मोहब्बत करने वालो के नाम।

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