गर मासुमो का कत्ल इतने से-
थम जाये वहसियो,
तो हमे शौक से हिंन्दू या मुसलमान बना दो।
ढहा दो मेरे जेहन का मंदिर,
मै शायर हूँ,मुहब्बत मेरी भूख है,
गर मै तेरी पूजा ना बन सका तो,
अज़ान बना दो।
बेशक मेरे हाथो से तुम छिन लो गीता
ऐ रंग-ये ख्वाहिश है
कि मासुमो का कत्ल ना हो,
चाहो तो इसके लिये,
इस ब्राह्मन को मुसलमान बना दो।
पेशावर मे मासुमो की कत्ल पे।
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