Rangnath Dubey's Poems
Saturday, 31 December 2022
(कलेन्डर की विदाई)
कभी पहली तारीख थी-----
आज़ आखिरी तारीख हूँ,
लाओ टाँगो एक और कलेन्डर---
मै उफ!न करुँगी,बस ये ख्व़ाहिश है कि,
मुझे अपने घर की दिवाल से,
ऐ,रंग----उसी प्यार से उतारो------
जैसे कभी टाँगा था।
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