Rangnath Dubey's Poems
Wednesday, 7 December 2022
(शहीद)
इस गाँव की औरत कभी बेवा नही होती।
इस गाँव मे कभी भी लाशे नही आती,
तिरंगे मे लिपटे शहीद आते है।
यहाँ की कोई भी बुढी माँ-
काशी या काबे नही जाती।
ऐ रंग-
वे फिर से शहीद बेटे की वर्दी का
धुल साफ कर
सरहद की हिफाजत के लिये-
पोते पालती है।
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