Tuesday, 6 December 2022

(पानी)
नही होने देता कभी हिन्दू-मुसलमान
हमे शराब का पानी।
वही छीन लेता है एक हसीन चेहरा,
जब कोई चाहने वाला-फेकता है----
चेहरे पे तेज़ाब का पानी।
हम भटकते गिरते चले जाते है,
जब उतरता है हमारे चेहरे से------
हमारी किरदार का पानी।
हमे जोड़ता है,धर्म और मज़हब से,
कभी दोआब---------
तो कभी हरिद्वार का पानी।
हमे फ़ना भी करता है,
चेन्नई की तरह,रंग--------
देख लो वहाँ तमाम लाशे,
और सैलाब का पानी।

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