Tuesday, 13 December 2022

(एक खूबसूरत एहसास है)
गुनगुनी धूप में------------------
खुले बाल तेरा छत पे टहलना,
एक खूबसूरत एहसास है।
मै तकता हू एकटक तुम्हे चोर नज़र,
पता ही नही चलता कि-------------
तेरे पाँव तले छत की ज़मी है,
याकि मखमली घास है।
गुनगुनी धूप में------------
खुले बाल तेरा छत पे टहलना,
एक खूबसूरत एहसास है।
ये उजले से दाँत,गुलाबी से होठ,आँखो मे शर्म
और हवा से बिखरे बालो का,
अपनी नर्म-नाज़ुक सी अँगुलियो से हटाना,
ये महज चेहरा नही----------
एक खूबसूरत चाँद है।
गुनगुनी धूप में---------
खुले बाल तेरा छत पे टहलना,
एक खूबसूरत एहसास है।
हर्फ-दर-हर्फ मेरे अंदर समा रही,
ये तेरी उजली ओढ़नी और सफेद सलवार,
महज तेरे बदन से लिपटी,
शरारत करती कोई सहेली नही,
बलकि मेरी गज़ल और उसके बहर की----
एक खूबसूरत लिबास है।
गुनगुनी धूप में-------------
खुले बाल तेरा छत पे टहलना,
एक खूबसूरत एहसास है।

@@@कलके रोमांटिक धूप की रोमांटिक याद जो शायद आप सबो को अच्छि लगे।

रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

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