Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 29 December 2022
(ऐ संगदिल)
ऐ संगदिल-
इतनी सी मु-रौवत कर दे।
बस आखिरी मर्तबा-
मेरी अश्क-ऐ-रूह की तरफ,
तु अपनी सुरत कर दे।
फिर शौक से ऐ,रंग-
तु सुपूर्द-ऐ-खाक मेरी मईयत कर दे।
ऐ संगदिल-
इतनी सी मु-रौवत कर दे।
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