Friday, 23 December 2022

(तवायफ़ की कब्र है)
यहाँ चराग नही जलते,कोई चादर नही चढ़ती,
ये शहर की-------
मशह़ूर तवायफ़ की कब्र है।
आज भी करती है ये रुह़े मूज़रा,
फिर फूट के रोती है।
ऐ,रंग--बस आ जाते है खिज़ा में----
दरख्त़ो के चंद पत्ते आवारगी करने।
ये शहर की------
मशह़ूर तवायफ़ की कब्र है।

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