मुझे भुलना मत-----------
एै मुझे टूट के चाहने वाले।
मै फ़ना हो जाऊंगा तेरी लहरो मे शौक से,
बस मुझे अपने से अलग मत करना-------
एै मुझे टूट के चाहने वाले।
जलने देना मेरा मासूम चरागे दिल किसी कोने मे,
बेसक बुझ जाऊंगा सहर होने तक,
पर तु बेरुख़ी से ना बुझाना----------
एै मुझे टूट के चाहने वाले।
बेशक मेरी ख्व़ाहिशे मईयत गुजरे तेरे कुचे से,
पर आँख मे आँसू लिये ना आना अपनी छत पे,
मै तड़प उठुंगा मर के भी ,
क्योंकि तुम्हें इस हाल मे देखु एैसी हिम्मत नही मुझमें------------
एै मुझे टूट के चाहने वाले।
@@@एक बेहद उम्दा मोहब्बत करने वालो के नाम नज्म़।
सहर----सुबह।
रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758
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