तुम संभलो मुझे गिरने दो-----------
मुझे शराबी लत है,कुछ गहरे उतरने दो।
तुम बधे हो,बधे रहो----------
अपने वक्ते नमाज़ और पूजा से!
मेरे रास्ते मे मंदिर-मस्जिद नही मैकदा पड़ता है,
हाथ धोने दो और मुझे शराब से वजू़ करने दो।
ये महज बोतल नहीं गंगा का पानी आबे जमजम है,
ये हमारी शरिकेहयात़ बीबी का बदन है,
तुम दुर रहो हम काफ़िरो से
और नशे में हम इश्क़े शौहरो की,
एै,रंग-------ये रात गुजरने दो।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.------7800824758
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