Tuesday, 6 December 2022

(इंतजार करके रोयी)
खुद को बाँहो मे भर के रोयी,
वे तवायफ थी-
हर रात सजके रोयी।
थिरके पाँव,टुटे घुघरू
ऐ रंग-
वे कितना इंतजार करके रोयी।

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