Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 15 December 2022
(अपने मुल्क से बिछडी हूँ)
मुझे ना बताओ------------
मै तुमसे भी ज्यादा,दर्द से गुजरी हूँ।
तुमने तो कमाने के लिये,
बस घर छोड़ा है ऐ,रंग------
मै तो अपने मुल्क से बिछड़ी हूँ।
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