Saturday, 26 August 2023

(घर की पैंजनी रोती है)

(घर की पैंजनी रोती है)

बद्चलन-----
रातो की आगोश मे सो तो लिया!
पर कभी सोचना ऐ,रंग-------
कि तुम्हारे इंतज़ार मे सारी रात,
घर की पैंजनी रोती है. 

@@@ रंगनाथ द्विवेदी, 
 जिला जौनपुर, उत्तर प्रदेश

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