(रविवार लिखा)
तुमने ही तो---------
मेरी दिल की डायरी में रविवार लिखा.
तुमने ही इसे फाड़ा,इसे ठुकराया
और--------
किसी गैर की डायरी में रविवार लिखा.
मेरे ख्वाब की आँख में रेत भर आई,
मै किसी------
मछली सा तडपता हूं,
ये छुट्टी नही,
मेरी दर्द का दिन है,
फाड़ देता हूं इस दिन मै,
अपने घर का कैलेंडर भी----
जहां पढ़ता हूं रविवार लिखा.
अब तो इतनी सी दुआ है रब,
कि मेरी तरह ना तड़पे कोई,
और किसी की जिंदगी में न आये,
फिर इस तरह------
डायरी में रविवार लिखा.
@@@रचयिता--रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी, मियांपुर
जिला-जौनपुर 222002 (U.P.)
Mo.no.7800824758
यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.
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