इस गांव की औरत
कभी विधवा नहीं होती,
इस गांव में कभी
लाशे नहीं आती
तिरंगे मे लिपटे शहीद आते है.
यहां की कोई भी बूढ़ी मां,
काशी या काबे नही जाती,
ए,"रंग"--
वे फिर से शहीद बेटे की,
वर्दी का धूल साफ कर,
सरहद की हिफाजत के लिये
पोते पालती है.
इस गांव की औरत,
कभी विधवा नही होती.
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