Sunday, 27 August 2023

(दाना मांझी)

(दाना माझी)
दस किलोमीटर----------
अपने कांधे पे पत्नी की लाश लादे,
खुरदरे नंगे पाँव चला दाना माझी।
इस देश में झुठी संवेदना का फर्जिपन,
नंगा हो गया!
सच तेरी ये असीम पिड़ा मेरी कविता को,
बहुत खला दाना माझी।
कुछ दिन अखबारो में,टी बी में
तुमपे बहस और चर्चा होगी,
तुम्हे अपनी पत्नी की लाश लादे हुये दिखाया जायेगा-------------
कई-कई बार दाना माझी।
फिर विस्मृत कर दिया जायेगा हमेशा के लिये--------------
तेरा ये ना भरने वाला घाव दाना माझी।
क्योंकि यही विभत्स सच जीना,
अपनी बिटिया की अँगुलि पकड़े------
तेरी किस्मत है दाना माझी।
###एक भयावह सच जो कही-कही आज भी जिंदा है दाना माझी के रुप में,इस घटना ने हमारी संवेदना के नकली मुखौटे को नोच लिया है।
@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी।
एडवोकेट कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।

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