Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 1 February 2024
(चूल्हा नही जलता)
(चूल्हा नही जलता)
तुम तो बात-बात मे शहर जलाना जानते हो,
तुम्हारे पास तो कौमो को जलाने का ईधन है।
पर यहां फाँकाकशी सोने नही देती,
पेट तो जलता है,रंग--------
पर इस बस्ती में अक्सर चूल्हा नही जलता।
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