(अपनी प्रीत के साथ)
हमारे भाव
हमारी गीत के साथ
मै जीता हूं
तुम्हारी प्रीत के साथ.
एक जन्म
और सात जन्म कम है
प्रिए ––
इस कायनात और श्रृष्टि
के आखिरी क्षण तक
तुम्ही मिलो
उसी रस्म
और उसी रीत के साथ.
खिले फूल
गुलमुहर के फरवरी में
तुम सरसों सी शर्माओ
मेरी दिल के खेत में
मै तुम्हारे जन्मदिन की
पगडंडियों पर चलूं
और तुम्हें पढूं
पहली चिट्ठी की तरह
और तुम लद जाओ
शर्म से ––
जैसे लदी थी कभी
तुम मेरी पहनाई हुई
सिंदूर और उसकी शीत के साथ.
🌹🌹🌹🌹♥️♥️♥️♥️♥️
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