Rangnath Dubey's Poems
Sunday, 4 February 2024
(आपके सीने से लग)
(आपके सीने से लग)
मै बहुत संम्भाल के रखती हूँ,
अपने सुहागरात की नथ।
ये वही गहना है--------
जिसे आप अब भी,उतारते है पहले की तरह!
मै इतने सालो के बाद भी-----
शर्मा जाती हुँ आपके सीने से लग।
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