Friday, 23 February 2024

(कसाब की बात)

(कसाब की बात)
गर्त में शिक्षा और किताब की बात,
चरित्रहीन भी करने लगे अब नकाब की बात!
पुरे साल फूकते रहे जो बागे गुलिस्ताँ-----
वे भी कर रहे अब गुलाब की बात।
थू कितनी गिर गयी है राजनीति,
कि चुनाव जितने के लिये एै"रंग",
करनी पड़ रही अमित शाह को भरे मंच से-
अब बरोजगारो के लिये जाब नही-------
बल्कि अर्थ बदल के एक आतंकी कसाब की बात।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758

धन्यवाद!दैनिक वर्तमान अंकुर,निर्मेश के त्यागी भईया और मेरे चुनावी कटाक्ष।

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