Sunday, 25 February 2024

(दो घाव हो गए)

( दो घाव हो गए )

जिन उरोजों को ढ़क,
वे मासूम देखती थी,
कभी वात्सल्य का सपना.

ए "रंग "
उसके वही दोनों उरोंज,
गरीबी के चलते-
"दो घाव हो गए".

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