Rangnath Dubey's Poems
Friday, 16 February 2024
(आवारा मुसाफिर हूं)
(आवारा मुसाफ़िर हूँ)
किसी के गेसुओ के तले---------
मै जीवन गुजारु ये मुमकीन नही!
क्यूँकि ऐ,रंग----मै शौहर नही-----
खुद की जिंदगी का,
आवारा मुसाफ़िर हूँ।
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