आने वाली सदियाँ,करेंगी उसको याद,
उसने ख़ून के कतरे से लिखा----
मूल्क़ जिंदाबाद।
ऐ हूस्ऩ आज इतनी कागज़ पे जगह छोड
लिखने दे हमे,रंग---
उसके कनपटी की आखिरी गोली----
और मूल्क़ जिंदाबाद।
चंन्द्रशेषर आजाद की याद मे,मेरी भावनाओ के चंद फूल---वंदे मातरम,,,इंकलाब जिंदाबाद।
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