Thursday, 22 February 2024

(आवारा किस्सों में याद रहूंगा)

(आवारा किस्सो मे याद रहुंगा)
एै दुनिया--------------------
मै अपने आवारा किस्सो मे याद रहुंगा।
किसी तवायफ के कोठे की वे बदनाम रौशनी,
जहां की सिढ़ियो पे पड़े थे मेरे पाँव,
मै उन अनगिनत-----------
कोठे की सिढ़ियो पे याद रहुंगा।
एै दुनिया------------
मै अपने आवारा किस्सो मे याद रहुंगा।
जब कही-------------
पीने-पिलाने वालो की बोतले खुलेंगी,
कहकहे और गम छलकेंगे,
मै एैसी हर जगह----------
की बदनाम चुस्कियो मे याद रहुंगा।
एै दुनिया-------------
मै अपने आवारा किस्सो मे याद रहुंगा।
बहुत कुछ लिखा है मेरी कलम ने------
मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारे पे,
लेकिन वे कुछ अलहदा नही आम सा लेखन है,
हाँ! एक किताब है जिसमे मैने---------
एक औरत को मुकम्मल नग्न कामुक,
शारिरीक संबंधो की तपती आँच पे लिखा है,
जो शायद मुझे अपने वक़्त का मंटो बना देगी,
लोग आहे भर पढ़ेगे!
तमाम अदब की मज़लिसो में आलिम-फाज़िल लोग मुझे उधेड़ेंगे,
मै उनकी उन्ही जलिल करते हुये----
हर्फो मे याद रहुंगा।
एै दुनिया----------
मै अपने आवारा किस्सो मे याद रहुंगा।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758
धन्यवाद!जोधपुर राजस्थान से प्रकाशित दैनिक नवज्योति के साप्ताहिक कालम नव ऐक्सप्रेस का जिसमें मेरी कविता"आवारा किस्सो में याद रहुंगा"प्रकाशित हुई इसके लिये मै बड़े भाई नरेन्द्र चुअरा व संपादक बड़े भाई प्रविण दवे का हृदय से धन्यवाद व्यक्त करता हूं।

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