Rangnath Dubey's Poems
Sunday, 18 February 2024
(याद के हर बुर्ज पर बैठी हो)
(याद के हर एक बूर्ज़ पे बैठी हो)
जुदा कर लोगी हमसे ये हुस्ऩे बदन लेकिन,
तुम उड़ न सकोगी,मेरी मौत से पहले!
क्यूँकि तुम हमारी----------
याद के हर एक बूर्ज़ पे बैठी हो।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment