Sunday, 12 April 2020

व्यंग्य---(1 अप्रैल और महेंद्र मिश्र को पद्मश्री )

व्यंग--( 1 अप्रैल और महेंद्र मिश्र को पद्मश्री)

 हम सभी लोकल और राष्ट्रीय मूर्ख इस 1 अप्रैल को अपने संगठन के महान और धुरंधर मूर्ख महेंद्र मिश्र के लिए भी अन्य विधा के व्यक्तियों की तरह ही उनके पुरस्कार की घोषणा अर्थात "मूर्खों के प्रथम पद्मश्री  से नवाजा जाए की मांग करते है".क्योंकि--"महेंद्र मिश्र ने मूर्खों के हित में वह कार्य किया है जो कार्य कभी देश की स्वतंत्रता के लिए महात्मा गांधी या नेहरू ने किया था". एक सफल मूर्ख होने की लालिमा उनके चेहरे पर स्पष्ट देखी जा सकती है. कभी-कभी किसी उपेक्षित जगह  लेकर फेंके गए पुराने अखबार की तरह लगते हैं. हां थोड़ा बहुत कुछ  नए मूर्ख जो अपनी मूर्खता की आंखों से अर्ध नग्न नायिकाओं की छपी फोटो या तस्वीर को तक लेते हैं, तो लगता है कि जैसे इनके मूर्ख होने की  तथाकथित सावन की शुरुआत हो गई है. जो भविष्य में इन्हें भी मूर्खता के इस महान यशस्वी मूर्ख पुरुष महेंद्र मिश्र में बदल देगी. 

मूर्ख होने के जितने भी एक्सीडेंट या दुर्घटनाएं है शायद ही कोई ऐसी महान  दुर्घटना बची हो, जो महेंद्र मिश्र के साथ न घटी हो. वे मूर्ख होने की हमारे देश की सबसे बेहतरीन जिंदा ग्रंथावली हैं--"उन्हें पढ़ना या उनसे बात करना किसी भी स्तरीय मूर्ख की राष्ट्रीय उपलब्धि है". वे हम मूर्खों के आराध्य हैं. शायद एक दिन यह अवश्य आएगा जब मूर्खों के लिए 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक सदन हम मूर्खों के लिए विशेष रूप से चलाया जाएगा. और उस सत्र को पूरी दुनिया महामूर्ख सत्र के तौर पर जानेगी, एक नजीर की तरह याद रखेगी. जिसमें हमारी जायज मांग को ध्वनिमत के साथ पूरे सदन को अंगीकार करना होगा. क्योंकि हम भली-भांति जानते हैं कि सदन में भी " 60% किसी न किसी मूर्खता की चपेट के मूर्ख सदन में भी हैं   " लेकिन वे हमारे  राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र मिश्र की तरह मूर्ख जैसे व्याकरण के शब्द का ऐलान नहीं कर सकते. 

 ऐसा नहीं कि हम मूर्खो  के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र मिश्र जी के लिए पद्मश्री की मांग कोई गलत या खैरात है और ना ही उनकी मूर्खता पर की गई कोई दया है. इस महान देश में हर तरह हर जाति की लोगों को आरक्षण है, तो फिर मूर्खो को यह आरक्षण देने में हर्ज क्या है. जबकि इस बार की जनगणना अगर स्पेशल तौर पर मूर्खों पे कराई जाए तो मूर्खों के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र मिश्र के कथन के अनुसार " यह संख्या पूरे देश में सात करोड़ या उसके ज्यादा के आसपास होगी. "

 इस 1 अप्रैल को मूर्ख दिवस कहने वालों को शायद यह पता नहीं कि -- " 1 अप्रैल महज मूर्ख दिवस ही नहीं बल्कि वे  हम जैसे मूर्खों का 15 अगस्त है. " आइए इसे हम आप सभी मूर्ख अपनी जायज मांगों के साथ सरकार तलक पहुंचाएं. अर्थात इस 1 अप्रैल को हम सभी ग्रामीण,  स्थानीय,  जिला स्तरीय,  राज्य स्तरीय,  राष्ट्रीय मूर्खों के हित के लिए एक जन लोकपाल बिल की मांग इस सरकार से करे या उसे पारित कराने की मांग के साथ अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र मिश्र के लिए प्रथम मूर्खों के पद्मश्री की मांग करें. 


यह व्यंग मेरा स्व-लिखित व अप्रकाशित है. 
दिनांक--9/3/2020

लेखक--रंगनाथ द्विवेदी 
जज कालोनी, मियांपुर 
जिला-जौनपुर pin.no.222002 (U P)
Mo.no.7800824758

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