मैं भी अन्य बारातियों की तरह अपने गांव की एक शादी में गया था, नाश्ते व भोजन के बाद पता चला की बारात में शहर की सबसे मशहूर आर्केस्ट्रा पार्टी का इंतजाम भी बारातियों के मनोरंजन के लिए है. क्योंकि मैं उत्तर प्रदेश से हूं वहां आर्केस्ट्रा का अपना ही क्रेज है कभी-कभी तो आर्केस्ट्रा डांस के दौरान मारपीट हो जाना, गोली चल जाना आम बात है और भोजपुरी गाने के साथ आर्केस्ट्रा के महिला डांसरों का अपने अंग विशेष को दिखाकर किया डांस मानो आग में घी का काम करता है.
हालांकि उस बारात में ऐसा कोई वाकया ना घटित हुआ जिसमें कि मैं बारात गया था. हां उनमें एक ऐसी डांसर अवश्य थी जिसके डांस पे सारे बाराती अपने पुरुषोंचित तरंग में आ गए थे! यहां पुरुषोंचित तरंग से मतलब वे अश्लील फब्तियां व कमेंट है जो कि अक्सर इस तरह के डांस में एक सामान्य सी बात है. कुछ लोग नोटों को चूम चूम कर ऐसे उड़ा रहे थे मानो नोटों की कोई फैक्ट्री इन्हीं के घर है. हालांकि मैं भी इस डांस से आनंदित व आह्लादित था. जैसे ही वे परदे के उस तरफ गई और उसकी जगह कोई और महिला डांसर स्टेज पर आई तो मेरा मन जैसे उस डांस से उचट गया.
मैं जैसे ही उठकर बारात से घर जाने के लिए आगे बढ़ा तो मेरे कदम बरबस पर्दे के उस तरफ एक नजर उस महिला डांसर को देख लेने की जाने क्यों बलवती हुई और मैं धीरे से उस परदे को खींच के ज्योंहि, अंदर देखा आवाक रह गया जो महिला अभी तलक स्टेज पर तमाम तरह की फरमाइशी गानो पर जानलेवा व अश्लील डांस कर रही थी वही औरत दौड़ती हुई अपने मासूम बच्चे को गोद में लेकर जैसे ही उसे अपना स्तनपान कराने लगी वे बच्चा चुप हो गया. मैं खुद को उस समय इस आत्मग्लानि से ना रोक पाया.
अब मैं समझ पाया कि आखिर क्यों भूख अक्सर अपने पांव में घुंघरू बांध लेती है, एक मां क्यों अपने बीमार वह भूखे बच्चे की दवा के लिए अंधेरी रात में अपने सीने पर किसी गैर मर्द की बलात्कार के तवे की रोटी अखबार में लपेट कर लड़खड़ाते वा सूजी हुए होठों के साथ अपनी झोपड़ी में लौटती है आखिर क्यों एक मां अपने मासूम बच्चे को पर्दे के इस तरफ रोता छोड़कर किसी बारात में सारी रात आर्केस्ट्रा बे नाचती है. सच महज यह मेरे द्वारा देखी गई एक आर्केस्ट्रा नहीं बल्कि उसकी वह उसके बच्चे के भूख की रोटी है.
यह कहानी मेरी स्वलिखित व अप्रकाशित है.
लेखक---रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला--जौनपुर pin. no. 222002 (U P)
Mo. no. 7800824758
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