Monday, 13 April 2020

लघुकथा---(भूख से मरे शायर का दिवान )

एक भूखा शायर जो अपने जैसे भूखे शख्स की रोटियों की मजार पे लिख गया----------

                (भूख से मरे शायर का दिवान )

जी हाँँ! हमारे शहर मे फूटपाथ किनारे दिनभर वे बीड़ियाँ बनाता और उन्हें सेंकता था, तैयार हो जाने पर जब वे कुछ बीड़ियाँ बेच लेता तो उन्हि चंद पैसे से कुछ सुखी रोटियां व प्याज से अपने दोजख को किसी तरह भर बगल से गुजर रहे सप्लाई के काई लगी टोटी से पानी पी कई सालो पुराना मैला-कुचैला फटा कंबल निकाल वही अपनी बिड़ी बनाने और बेचने वाली फूटपाथ की जगह सो अपनी रात गुजार दी.

वही बिड़ियाँ बनाने और बेचने वाला शायर जिस दिन बिड़ियाँ न बेच पाता उस रात वे एकाध बिड़ि सुलगा अपनी होठों से लगा इधर-उधर से बीने हुये सादे कागज़ पे अपने दर्द के नग्में लिख उसे उसी बिड़ी वाले बाकडे के एक सुरक्षित जगह रख देता.

ऐसे ही एक दिन भूख मे सोये हुये उस शायर की मौत हो गई, काफी दिन निकल आने पे भी न उठा तो उसे पुलिस वालो ने उठाने की कोशिश की तो वे मरा पड़ा था,डाक्टर के बुलवाने पे पता चला कि इसकी मौत भूख से हुई है। उस शायर की जब सारी छान-बीन पुलिस वालो ने की तो उसकी नज्मों के वे सारे कागज़ बरामद हुये.

उस समय जो शहर कोतवाल आया हुआ था वे भी शेरो-शायरी और नज्मों का काफी शौकीन था,उसने अपनी मदत से और कुछ स्थानीय सेठ-साहुकारों की मदत से जब उस भूख से मरे शायर का दिवान छपवाया तो उस दिवान ने बिकने के सारे रिकार्ड तोड़ दिये। आज वे जिस शहर की फूटपाथ पे भूख से मरा था उसी शायर के नाम लाखों-लाख के मुशायरे होते है। लेकिन वे भूखा शायर "कभी किसी जश्न या त्यौहार पे नही लिखता था, वे अपनी तरह औरो के दोजख की भूख व उनकी रोटियों की मजार पे लिखता था" ।

@@@रचयिता---रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जिला--जौनपुर पिन.नं.--222002(उत्तर-प्रदेश)।
Mo.no.---7800824758

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।

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