Monday, 20 April 2020

कविता---(मजदूरन की सुंदरता )

कविता----(मजदूरन की सुंदरता )

चील-चिलाती धूप में
आकर्षित करती है, 
मेरी कविता को----
उस मजदूरन की सुंदरता.
जो अपने दूधमुहें बच्चे को, 
बगल में छाया कर लिटा,   
पसीने से तर-बतर भीगी 
चलाये जाती है, 
छोटा सा फावड़ा
उस बच्चे का---
बीच-बीच में रोकर, 
अपनी मजदूरन माँ को बुलाना, 
और उस मजदूरन माँ का,  
विह्वल हो--
अपने दूधमुहें बच्चे को ,  
स्तनपान कराना, 
और फिर उसे लिटा----
पहले की तरह
चील-चिलाती धूप में,
फिर से फावड़े को चलाना, 
और पसीने से तर-बतर भीग जाना, 
सच कितनी आकर्षित करती है, 
मेरी कविता को------
तब उस मजदूरन की सुंदरता. 


यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है. 

रचनाकार---रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियांपुर 
जिला--जौनपुर pin.no.222002 (U P)
Mo.no.7800824758

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