Saturday, 4 April 2020

व्यंग्य---(अप्रैल चालीसा )

व्यंग्य----(अप्रैल चालीसा )

 हमारे "अप्रैल चालीसा" के नेताजी कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि--हमारे व्यंग्य लेख "अप्रैल चालीसा" के असाधारण नायक है. मैं जबसे उन्हें बाइज्जत जानता व पहचानता हूं तब से उन्हें मैंने औरों को--"मूर्ख बनाकर उनकी खटिया को खड़ी करते हुए पाया है". उनके इस ऐतिहासिक अप्रैली चरित्र ने उन्हें बहुत कुछ दिया है. 

यहां तक कि उन्होंने सबसे पहले अपने होने वाले ससुर को ही--"अपने अप्रैल का पहला मूर्ख बनाया था और दूसरी मूर्ख उन्होंने, अपनी होने वाली पत्नी को बनाया था".बाकायदा नेता जैसी अपने बौद्धिक आश्वासन से अपने ससुर और पत्नी को मूर्ख बनाना नेताजी के जीवन की बड़ी उपलब्धि थी.

 शादी के शुरुआत में पत्नी यह नहीं समझ पाई की नेताजी को अप्रैल हमेशा से ही किसी जवान साली की तरह प्राप्त और सुख देती रही है. नेताजी वक़्त-बेवक़्त अपनी साली को भी मूर्ख बनाने से नहीं चूकते थे एक तरह से उनका कुर्सी और साली का संबंध अप्रैल के लिव इन रिलेशनशिप का था.  

 तीन बार विधानसभा और दो बार लोकसभा का चुनाव उन्होंने अप्रैल यानी तथाकथित मूर्खों के सीजन या महीने मैं जीता था. वे पूरे अप्रैल-- "उल्लू की फोटो के सामने घंटों खड़े होकर लोगों की मूर्खता फलती फूलती रहे इसके लिए वे अपने अलूल-जलूल मंत्रों का उच्चारण कर  जागरण करते थे". जिस दिन उनके इस जागरण का अर्थात अप्रैल के मूर्ख महीने की पूर्णाहति होती थी, उस दिन वह बकायदा  लोगों को भंडारे में प्रशाद वितरण करवाते थे.  
 

 नेताजी--"औरों को मूर्ख बनाने वाली मेरी सुनामी यादों के इकलौते पात्र हैं, मैंने आज तलक एक व्यक्ति में एक साथ इतने अलंकारिक परिवर्तन नहीं देखें". उनका मुंह मुझे देखने में अंग्रेजी शराब के कॉकटेल की तरह दीखता है,  जिसमें वे गरीबों के देसी तलाक मिलाकर गटक जाते है.

 अप्रैल को जो लोग मूर्खों का महीना या एक अप्रैल को जो लोग मूर्ख दिवस कहते हैं या मनाते है, उन्हें हमारे नेता जी की गुणवत्ता का पता नहीं कि--"वे हमारी व्यंग्य लेख 'अप्रैल चालीसा' के कितने विद्वान महानायक हैं". जिन्होंने इसको गलत साबित कर दिया है, उन्हें मैं भी कभी भाप ना पाता अगर मैं--"फेस रीडिंग का उन्हीं की प्रजाति का अप्रैली विद्वान ना होता". मैंने यह सोच लिया है कि मैं अपनी इस फेस रीडिंग की किताब का नाम "अप्रैल चालीसा" रखूंगा जिसका विमोचन मैं इन्हीं होनहार नेताजी से किसी ऐसे ही अप्रैल महीने में कराऊंगा. 

यह व्यंग्य लेख मेरा स्वलिखित व अप्रकाशित है. 

लेखक--रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियांपुर 
जिला--जौनपुर pin. 222002 (U P)
Mo. No. 7800824758

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