(काग्रेंसी जनाजा निकला)
बे-आबरू हो गये-----------
जब कर्नाटक से भी काग्रेंसी जनाजा निकला।
हाय! साँप लोटा कलेजे पे एक मर्तबा फिर----
जब भाजपा की जीत का बाजा निकला।
शनी ,राहू ,साढ़े साती क्या कहूँ ?
मैं माँ हूँ राहुल की जानती हू,
मुँह लटकाये बेटे को तकने का दर्द,
उफ! लाख चाहा पर क्या करू ?
किस्मत ही एैसी है कि वे,
खानदानी चश्मोंचिराग,लख्त़ेजीगर-------
एक और राज्य से बीन बने राजा निकला।
ये मोदी और शाह का तिलिस्म क्या है ?
समझ से परे,
कि जब भी कोशिश की इन्हें मात देने की-------
तो हर बार गलत काग्रेंस का अंदाजा निकला।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर----222002 (उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.----7800824758
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