Tuesday, 30 May 2023

(ईदी मांगती है)
दो दिन से भूखी बच्ची कुछ दे दो दिदी मांगती है,
गरीबी वे शै है जो हर रोज ईदी मांगती है।
उसके नन्हे-नन्हे पाँव दूर निकल आते है,
उसकी थकन फिर चल पड़ना,
उफ! कलेजा हिल जाता है जब किसी दरवाजे,
वे अपनी चारपाई पे पड़ी बीमार माँ के लिये-------
एक फटी धोती मांगती है।
हर रोज ईदी मांगती है-----
स्कूल की वे बड़ी सी बिल्डिंग और,
उसमे ढ़ेरो बड़े घरो से आती बेटिया,
वे एक बार तक--------
रो देती है किस्मत पे अपनी कि वे भीख मांग रही,
और ये बड़े घरो की बेटिया---------
अपने माँ-बाप से तालीम ऊँची मांगती है।
इस तपन मे जल रहे उसके पाँव नंगे,
उफ!मै लिख नही सकता ये हादसा,
छाले पड़ रहे है हर्फ-हर्फ ये सुन------
कि वे एक दरवाजे चप्पल टुटी मांगती है।
दो दिन से भूखी बच्ची कुछ दे दो दिदी मांगती है,
एै"रंग" गरीबी वे शै है जो हर रोज़ ईदी मांगती है।

@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

No comments:

Post a Comment