दो दिन से भूखी बच्ची---
कुछ दे दो,दीदी
मांगती है.
गरीबी वे शै है,---
जो हर रोज,
ईदी मांगती है.
उसके नन्हे-नन्हे पांव,
दूर निकल आते है,
उसकी थकन फिर चल पड़ना,
उफ!! कलेजा हिल जाता है,
जब किसी दरवाजे पे
अपनी चारपाई पे पड़ी,
बीमार मां के लिए,
एक फटी ,---
धोती मांगती है.
ऐ"रंग"-गरीबी वे शै है,---
जो हर रोज,
ईदी मांगती है.
यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.
रचनाकार---रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला--जौनपुर pin.no.222002 (U P)
Mo.no. 7800824758
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