Rangnath Dubey's Poems
Tuesday, 16 May 2023
(ताज़महल से चिटकने की आवाज आती है)
सुनो तो---------
ताज़महल से सिसकने की,
एक आवाज़ आती है.
ये आवाज़-----
उसके संगतराश की है,दर्द की है
कभी-कभी तो जैसे ऐ "रंग"
ताज़महल के किसी पत्थर से,
चिटकने की-------
एक आवाज़ आती है.
@@@रंगनाथ द्विवेदी.
7800824758
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