Rangnath Dubey's Poems
Monday, 22 May 2023
(चाय है साहब )
इसकी सोंधी महक--
लिप्टन और ताज़महल से भी,
मशहूर है साहब.
इसकी चुस्कियों के आशिक,
वाह! वाह! करते हैं,
ये हसीन शाम की,
गुलबदन है,
और मुझ जैसे शायर की,
चाय है साहब.
@रंगनाथ द्विवेदी
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