Rangnath Dubey's Poems
Tuesday, 23 May 2023
(अमेठी गई)
बाप - दादा की ,खेती गई ,
उनके आत्म-सम्मान की ,पेटी गई.
अब तो राजनीति से ----
सन्यास ले लो मियां ,
क्योंकि ,- रूझानों से लग रहा
कि ,- तुम्हारे हाथ से अमेठी गई .
@@ रंगनाथ द्विवेदी
## 7800824758
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