औरंगजेब की रूह,
आज हमारी सनातन आस्था
और संस्कृति से हार गई,
शिव
तमाम आक्रांताओं
के बाद भी
हमारी अंतस में
जीवित रहे
और जीवित रही
हमारी वह काशी
जो कभी कबीर,
बिस्मिल्ला खान
ने देखी,
और जय शंकार प्रसाद,
और नसीर बनारसी ने परखी.
ज्ञानवापी
हमारे आस्था का लम्बा
वनवास था
जो
इतने विराट शिवलिंग के मिलते ही
खत्म होता दिखाईं पड़ रहा,
आइए
हम वैदिक
विजय की इस घड़ी में
संयम बरते
और अपनी काशी को
वही काशी रहने दे,
जो इस नगरी की
सनातन पहचान हैं
अर्थात
काशी का फक्कड़पन.
हर हर महादेव 💐💐💐💐🙏🙏🙏🙏
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