जब सभी ने छोड़ा मुझको-
तो हाथ मे मदिरा रही.
हम तड़प के रो उठे,
कोई नही,कोई नहीं-------
बस साथ मे मदिरा रही.
घर मेरा शमशान सा था,
और साँस मे मरघट मेरे ,
मै फिर भी जिंदा रह गया ,
क्योंकि बिस्तर पे भी मेरे---
रात में मदिरा रही.
रोजगाली ,रोज-नफरत
है इसे जाने क्यों हासिल ?
ये वफा है,ये वफा है
बाकी दुनिया बेवफा है,
मै गिरा तो ये गिरी,
सब आते जाते रह गये,
उस राह मे भी साथ मेरे--
बाँह मे मदिरा रही.
रचनाकार--रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला--जौनपुर (उत्तर-प्रदेश)
@@@एक अलहदा टेस्ट की अलहदा रचना जो शायद आपको भी रास आये।
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